सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

ख़ाते वक़्त सलाम करने के अहकाम

ro   

खाते वक्त सलाम करने में कोई हर्ज नहीं है, सुन्नत में ऐसा कुछ है जो कहता है कि ये अमल की इज्जत नहीं है। ये दूर तक फेल हुई अफ़वाह है कि खाने के वक़्त सलाम नै करना चाहिए ("ला सलाम 'अला ता'आम") या सलाम का जवाब नै देना चाहिए।

अल-'अजलूनी (रहीमुल्लाह) ने कशफ अल-खफा' में कहा: (ये जुमला) खाने के वक्त सलाम नहीं करना चाहिए ये हदीस नहीं है। अंत उद्धरण.

कुछ उलेमा ने कहा है कि खाना खाते वक्त हाथ नई मिला सकता है लेकिन सलाम करने में कोई हर्ज नई है।

इमाम नवावी (रहीमुल्लाह) अल-अधकार में फरमाते हैं। इसकी एक मिसाल कुछ ऐसी है कि अगर कोई खा रहा हो और हमारे मुंह में निवाले हो, अगर कोई उसे सलाम करता है तो वो सलाम के जवाब का मुश्तहिक नहीं है। लेकिन अगर वो खाना खा रहा हो और उसके मुंह में निवाले न हो तो उसको सलाम का जवाब देना चाहिए।

शेख 'अब्द अल-रहमान अल-सुहैम (रहीमुल्लाह) कहते हैं: ये कलाम लोगों की बात है और कोई हदीस नहीं है। इसका मतलब सही है अगर ये हाथ मिलाने के पशेमंजर में कहा गया है लेकिन अगर ये सिर्फ सलाम कहने के लिए मेरे पास है तो ये मन नई है जब कोई खा रहा हो। अंत उद्धरण.

http://www.almeshkat.net/index.php?pg=qa&ref=1027

और अल्लाह सब से बेहतर जानता है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

तयम्मुम करने का स्टेप बाय स्टेप तरीका

  ro    पानी ना मिलने की सूरत में (या दूसरे हालात जिसकी शरीयत ने इजाज़त दी हो) पाक मिट्टी को वुज़ू या ग़ुस्ल की नियत करके अपने हाथों और मुँह पर मलना तय्यमुम कहालता है। इसका तरीका ये है: 1. तयम्मुम की नियत करते हुए बिस्मिल्लाह कह कर अपने दोनों हाथ एक बार ज़मीन पर रखे। 2. फिर दाए हथेली का ऊपर वाला हिसा बाए हथेली पर फेर। 3. फिर से हथेलियाँ का ऊपर वाला हिस्सा दाएँ हथेलियाँ पर फेर। 4. फिर अपने दोनो हाथ चेहरे पर फेरे। आपकी तयम्मुम मुकम्मल हुई (इसके बाद वुज़ू के बाद पढ़ी जाने वाली दुआ पढ़ें।) •٠•●●•٠•

नमाज़ ए वित्र की दुआ ए क़ुनूत में हाथ उठ जाए या नहीं?

ro    नमाज़ ए वित्र की दुआ ए क़ुनूत में हाथ उठे के बारे में कोई मार्फ़ू रिवायत नहीं है लेकिन हदीस के किताबों में बाज़ सहाबा ए करम र.अ. के आसार मिलते हैं. इस्लामी शरीयत में जब कोई बात रसूलुल्लाह से ना मिले और सहाबा से वो अमल मिल जाए बिना किसी दूसरे सहाबा का एतराज़ किया तो हमें अमल को अपने में कोई हर्ज नहीं। लेकिन बेहतर यहीं होगा कि हाथ बंद के दुआ ए क़ुनूत पढ़ी जाए क्योंकि हाथ उठाने की कोई मार्फू हदीस नहीं है। इस्के मुतल्लिक शेख जुबैर अली ज़ई का रिसाला अल हदीस जो कि रजब १४३० हिजरी को शाया हुआ था उस रिसाले के सफा नं. १२ पर एक सवाल किया गया था कि, नमाज़ ए वित्र में रुकू से क़ब्ल हाथ उठे बिना क़ुनूत पढ़ने की क्या दलील है? जिसके जवाब में शेख जुबैर अली ज़ई ने फरमाया था, 'नमाज़ ए वित्र में रुकू से पहले क़ुनूत पढ़ने का ज़िक्र सुनन दरकुटनी (२/३२, हदीस- १६४४,वा सनद हसन) और सुनन नसाई (१,२४८ हदीस- १७००) में है। देखिये मेरी किताब हिदायतुल मुस्लिमीन (हदीस- २८ फैदा- ३)। क़ुनूत ए वित्र में हाथ उठना किसी सरीह मारफू हदीस से साबित नहीं है।' मालूम हुआ कि नमाज़ ए वित्र में रुकू से पहले हाथ उठे बिना...

हुज़ूर ﷺ के वफ़ात का वक़्त का बयान

ro    हुज़ूर ﷺ के वफ़ात का वक़्त: हज़रत:- उमर फारूक र.अ.:– वफ़ात की ख़बर सुन केर इनके होश जाते रहे और वो खरे हो केर कहने लगे “कुछ मुनाफ़ेक़ीन समझते हैं रसूलुल्लाह सल्लाहो अलिहे वसल्लम की वफ़ात हो गई लेकिन हकीकत ये है के रसूलुल्लाह ﷺ की वफ़ात नहीं हुई, बलके आप अपने रब के पास तशरीफ ले गये हैं। जिस तरह मूसा बिन इमरान अली सलाम तशरीफ़ ले गए थे और अपनी क़ौम से ४० रात गायब रह केर उनके पास फिर वापसी आ गए थे, हलाके वापसी से पहले कहा जार आहा था के वो इंतकाल कर गए हैं।” खुदा की कसम रसूलुल्लाह भी पलट कर आएंगे और उन लोगों के हाथ पाओ काट डालेंगे जो समझते हैं कि आप सल्लाहो अलिहे व सल्लम की मौत हो चुकी है। हज़रत अबू बक्र र.अ. :- मेरे मां बाप आप पर कुर्बान, अल्लाह आप पर २ मौत जमा नहीं करेगा, जो मौत आप पर लिख दी गई है वह आप को आचुकी। हमारे बाद अबू बक्र बहार तशरीफ़ लाए हमें वक़्त भी हज़रत उमर र.अ. लोगो से बात केर रहे थे, हज़रत अबू बक्र ने उन से कहा उमर बैठ जाओ, हज़रत उमर र.अ. ने बैठने से इंकार कर दिया। सहाबा हज़रत उमर को चोर केर हज़रत अबू बक्र की तरफ मुतवज्जा हो गए। हज़रत अबू बक्र ने फ़रमाया। अम...