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रसूलअल्लाह ﷺ की जनाज़ा की नमाज़

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अक्सर मुस्लिम उम्मत के आम लोगों के बीच ये सवाल रहता है कि रसूल अल्लाह ﷺ की जनाज़ा की नमाज़ हुई थी या नहीं। और जो लोग ये कहते हैं कि उनके जनाज़े की नमाज़ नहीं हुई थी वो उन सारी हदीसों से बहुत दूर थी और बा-ख़बर है जिन हदीसों में दर्ज़ है कि साहबाओं ने रसूलल्लाह ﷺ की जनाज़े की नमाज़ पढ़ी थी।

याह्या रिवायत करते हैं कि उनहोंने मालिक से सुना है कि उनहोंने सुना है पीर (सोमवार) को रसूलअल्लाह ﷺ की वफ़ात हुई थी और उनके मंगल (मंगलवार) को दफ़न किया गया था और लोगों ने अकेले ही उन के जनाज़े की नमाज पढ़ी बिना किसी इमाम के । 

मुवत्ता मालिक» दफ़नाने की किताब » किताब १६, हदीस २७।

हज़रत इब्न अब्बास र.अ. रिवायत करते हैं

...और फिर लोग ग्रोह में आए और रसूलअल्लाह ﷺ की जनाज़े की नमाज पढ़ी, और जब वो पढ़ चुके तो ख्वातीन आई और जब इनहोन पढ़ना खत्म कर दिया तब बच्चे ऐ और किसी ने इस नमाज की इमामत नहीं की।

सुनन इब्न माजा, अंत्येष्टि के संबंध में अध्याय, हदीस १६२८।

सुनन इब्न माजा, अंत्येष्टि के संबंध में अध्याय, हदीस 1628।

इमाम तिर्मिधि अल-शमाएल (पृ. 338) मुझे रिवायत करते हैं,

"रसूल अल्लाह ﷺ का इंतकाल 12वीं रबी अल-अव्वल 11 हिजरी में हुआ था सूरज के सबसे ऊंचे मुकाम के गुज़रने के बाद और मदीना के सारे लोगों के जनाज़े की नमाज़ पढ़ने के बाद उन्हें मंगल(मंगलवार) वाली रात को दफ़न किया था। अबू बक्र अल-सिद्दीक (आर.जेड.) ने कहा: कुछ लोग अंदर आए और तकबीर कहा और जनाजा की नमाज पढ़ी और दुआ मांगी, फिर वो वहां से चले गए जब तक के बाकी लोग अंदर आ गए।

(शेख अल्बानी ने इसे सही करार दिया है)।

अल्लाह से दुआ है कि वो हम लोगों को हक तलाश करके उसपर अमल करने की तौफीक अता करे। आमीन।

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