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क्या लिबास तबदील करने से वुज़ू टूट जाता है?

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क्या लिबास तबदील करने से मेरा वुज़ू टूट जाएगा? और क्या मर्द और औरत के मा-बेन क्या हुक्म में कोई फर्क है?

अगर कोई शक्स तहरत की हालत में हो और वो अपना लिबास तबदील कर ले तो उससे वुजू नहीं टूट-ता, क्योंकि लिबास तबदील करना वुजू टूटने में शामिल नहीं, और इस में मर्द ओ औरत सब बराबर हैं। वल्लाहो आलम .

वुज़ू जिन चिज़ो से टूट ता है वो ये है:

१ आगे हां पिचे की शर्मगाह से खारिज होने वाले आश्ये (पिशाब, पखाना, हवा वागैरा) लेकिन औरत की काबल से खारिज होने वाले हवा से वुज़ू नहीं टूट-ता।

२ आगे हां पीछे की शर्मगाह के इलावा और कहीं से पिशाब और खाना खत्म होना।

३ अक़ल ज़ाएल होना (होश-खोना), या तो मुकम्मल तौर पर अक़ल ज़ाएल हो जाए, यहीं मजनूं और पागल हो जाए, या फिर किसी सबाब के लिए कुछ देर के लिए अक़ल पर परदा पर जाए, मसलन नींद, बेहोशी, नशा, वगैरा .

४ अज़ू ई तनासुल (लिंग) को चुना :

क्या दलेल बसरा बिन्त सफ़वान र.अ. की हदीस है वो बयान करती हैं कि मैंने रसूल ﷺ को ये फरमाते हुए सुना:

"जिस ने अज़ू ए तनासुल को चुवा वो वुज़ू करे"

सुनन अबू दाऊद, अल-तहाराह, १५४.

५ ऊंट (ऊंट) का गोश्त खाना:

इस की दलील, जाबिर इब्न समुरह की हदीस है वो बयान क्रेट हैं कि एक शख़्स ने नबी ﷺ से दरियाफ़्त किया कि क्या हम ऊंट के गोश्त खाने के बाद वुज़ू करें?

रसूल ﷺ ने फरमाया से: "जी हां"।

साहिह मुस्लिम, अल-हयद, हदीस-५३९।

यहां एक चीज नोट करना जरूरी है कि औरत के जिस्म को छूने से वुजू नहीं टूटता, चाहे शेहवत (इच्छाओं की भावना) के साथ हो या बघैर शेहवत लेकिन इस के नतीजे में अगर कोई चीज खारिज हो तो फिर वुजू टूट जाएगा।

माज़ीद तफ़सील के लिए शेख इब्न 'उथैमीन, र.अ. की किताब अल-शरह अल-मुमती' खंड। 1, पी. २१९-२५० और फतावा अल-लजनाह अल-दायिमा, वॉल्यूम। ५, पृ. २६४ का भी मुताअला जरूर करे।

वल्लाहु आलम


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